दही एक पौष्टिक और पाचन को सुधारने वाला आहार है, लेकिन सावन (श्रावण माह) में इसे खाने को लेकर कई परंपराएं और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियाँ बताई जाती हैं।
आयुर्वेद और लोक मान्यताओं के अनुसार, सावन में दही का सेवन कुछ स्थितियों में हानिकारक हो सकता है।
रात के समय दही न खाएं
रात में दही खाने से कफ (बलगम), सर्दी और गला खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
जिन लोगों का शरीर ठंडी प्रकृति (cold body type) का होता है, उन्हें दही खाने से शरीर में ठंडक बढ़ सकती है और पाचन बिगड़ सकता है।
जिन्हें एलर्जी, साइनस या जुकाम रहता है
दही की तासीर ठंडी होती है, इसलिए एलर्जी, नाक बंद या बार-बार सर्दी-जुकाम वालों को सावन में दही नहीं खाना चाहिए।
बरसात में बनी नमी और बैक्टीरिया
बारिश के मौसम में नमी ज्यादा होती है जिससे दही जल्दी खराब हो सकती है और पेट के इंफेक्शन का खतरा रहता है।
अगर दही खट्टी हो गई हो
खट्टी दही पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकती है और पेट फूलना, गैस आदि की समस्या पैदा कर सकती है।
– अगर दही खाना जरूरी है तो दोपहर में खाएं।
– दही की जगह छाछ या मट्ठा का सेवन बेहतर माना जाता है।
– दही में थोड़ा सा काली मिर्च या गुड़ मिलाकर सेवन करें तो कफ नहीं बढ़ेगा।