डेंटल में इम्प्लांट में क्या होता है
डेंटल में इम्प्लांट में क्या होता है
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टाइटेनियम पोस्ट
– इम्प्लांट एक छोटी टाइटेनियम की पोस्ट (स्क्रू) होती है, जो जबड़े की हड्डी में फिट की जाती है।
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टाइटेनियम पोस्ट
– इम्प्लांट एक छोटी टाइटेनियम की पोस्ट (स्क्रू) होती है, जो जबड़े की हड्डी में फिट की जाती है।
दांत की जड़ का काम
– यह पोस्ट प्राकृतिक दांत की जड़ (Root) की तरह काम करती है और हड्डी के साथ जुड़ जाती है
दांत की जड़ का काम
– यह पोस्ट प्राकृतिक दांत की जड़ (Root) की तरह काम करती है और हड्डी के साथ जुड़ जाती है
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एबटमेंट (Abutment)
– पोस्ट के ऊपर एक कनेक्टर लगाया जाता है, जो क्राउन (दिखने वाला दांत) को होल्ड करता है।
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एबटमेंट (Abutment)
– पोस्ट के ऊपर एक कनेक्टर लगाया जाता है, जो क्राउन (दिखने वाला दांत) को होल्ड करता है।
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डेंटल क्राउन
– एबटमेंट के ऊपर एक सिरेमिक या मेटल-सेरामिक क्राउन लगाया जाता है, जो प्राकृतिक दांत जैसा दिखता है।
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डेंटल क्राउन
– एबटमेंट के ऊपर एक सिरेमिक या मेटल-सेरामिक क्राउन लगाया जाता है, जो प्राकृतिक दांत जैसा दिखता है।
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प्रक्रिया
– इम्प्लांट लगाने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि हड्डी और इम्प्लांट के बीच जुड़ाव (Integration) का इंतजार करना पड़ता है।
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प्रक्रिया
– इम्प्लांट लगाने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि हड्डी और इम्प्लांट के बीच जुड़ाव (Integration) का इंतजार करना पड़ता है।
बोन ग्राफ्टिंग (जरूरत पड़ने पर)
– अगर हड्डी कमजोर है, तो पहले बोन ग्राफ्टिंग की जाती है
बोन ग्राफ्टिंग (जरूरत पड़ने पर)
– अगर हड्डी कमजोर है, तो पहले बोन ग्राफ्टिंग की जाती है
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एनेस्थीसिया के साथ सर्जरी
– इम्प्लांट लगाने के लिए माइनर सर्जरी की जाती है, जो लोकल एनेस्थीसिया में होती है।
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एनेस्थीसिया के साथ सर्जरी
– इम्प्लांट लगाने के लिए माइनर सर्जरी की जाती है, जो लोकल एनेस्थीसिया में होती है।
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उच्च टेक्नोलॉजी
– आजकल डिजिटल इम्प्लांट प्लानिंग (CBCT स्कैन, 3D गाइडेड सर्जरी) से प्रक्रिया और सटीक हो गई है।
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उच्च टेक्नोलॉजी
– आजकल डिजिटल इम्प्लांट प्लानिंग (CBCT स्कैन, 3D गाइडेड सर्जरी) से प्रक्रिया और सटीक हो गई है।
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