थकान और आलस्य ज़्यादा सोने के बाद भी कई लोग पूरे दिन थका हुआ या सुस्त महसूस करते हैं। यह शरीर की स्लीप साइकल को बिगाड़ देता है।

डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ पर असर अध्ययन बताते हैं कि बहुत ज्यादा सोने से डिप्रेशन, चिंता (anxiety) और low motivation की समस्या बढ़ सकती है।

जो लोग नियमित रूप से 9 घंटे से ज्यादा सोते हैं, उनमें हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है।

ज्यादा नींद से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है, जिससे शरीर में चर्बी जमा होने लगती है और मोटापा बढ़ सकता है।

डायबिटीज़ का खतरा ओवरस्लीपिंग इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ा सकता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है।

स्मृति कमजोर होना (Memory Loss) ज्यादा नींद लेने से ब्रेन फंक्शन पर असर पड़ सकता है और याददाश्त कमज़ोर हो सकती है।

नींद की गुणवत्ता खराब होना जो लोग दिन में ज़्यादा सोते हैं, उनकी रात की नींद में खलल आता है। इससे नींद की गुणवत्ता गिरती है।