पेट में इंफेक्शन:– बरसात का मौसम जहां हरियाली, ठंडक और सुकून लेकर आता है, वहीं बीमारियों की एक लंबी फेहरिस्त भी साथ लाता है। इस मौसम में सबसे आम समस्या होती है – पेट में इंफेक्शन। बच्चे हों या बड़े, बारिश के मौसम में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और गैस जैसी समस्याएं अक्सर सुनने को मिलती हैं।
आखिर क्यों होती है ये समस्या सिर्फ इस मौसम में ज्यादा? क्या सिर्फ गंदगी ही इसका कारण है? और इससे बचने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है? आइए जानते हैं इस विषय पर विस्तार से।
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बरसात में पेट में इंफेक्शन होने के मुख्य कारण
1. गंदा और संक्रमित पानी का सेवन
बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने और नालियों के ओवरफ्लो होने से पीने का पानी भी दूषित हो जाता है। कई बार पाइपलाइन से गंदा पानी मिल जाता है, जो सीधे हमारे घरों तक पहुंचता है। यह पानी बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स से भरा होता है जो पेट में जाकर पेट में इंफेक्शन पैदा करता है।
2. सड़क किनारे या खुले में बना खाना
बरसात के समय गर्म-गर्म पकौड़े और चाट खाने का मन करता है, लेकिन खुले में बिकने वाला खाना कीटाणुओं से भर जाता है। बारिश के पानी और गंदगी से यह खाना जल्दी खराब होता है और खाने से पेट में इंफेक्शन हो सकता है।
3. हाथों की साफ-सफाई की कमी
बरसात में कीचड़ और गंदगी आम होती है। यदि आप खाने से पहले हाथ नहीं धोते, तो हाथों पर मौजूद बैक्टीरिया सीधे आपके पेट में चले जाते हैं। इससे फूड पॉयज़निंग या पेट में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
4. भोजन का सही ढंग से न पकना या खुला छोड़ना
नमी के कारण खाना जल्दी खराब हो जाता है, खासकर जब उसे ढक कर नहीं रखा जाता। खुले भोजन में मक्खियां बैठती हैं और अपने साथ हानिकारक कीटाणु भी लाती हैं, जो पेट में इंफेक्शन फैला सकते हैं।
5. फल-सब्जियाँ ठीक से न धोना
बरसात के दौरान बाजार की सब्जियाँ और फल भी गंदे पानी और कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं। इन्हें बिना अच्छे से धोए खाने से पेट में इंफेक्शन हो सकता है।
बरसात में होने वाले सामान्य पेट इंफेक्शन
- फूड पॉइज़निंग
- टायफाइड (Typhoid)
- अमीबायासिस (Amoebiasis)
- डायरिया और डिसेंट्री
- गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Gastroenteritis)
इन सभी बीमारियों के लक्षण लगभग मिलते-जुलते होते हैं – जैसे उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द, कमजोरी आदि।
बरसात के मौसम में पेट की बीमारियों से बचाव के असरदार टिप्स
1. फिल्टर या उबला हुआ पानी ही पिएं
बरसात में नल का पानी दूषित हो सकता है, इसलिए हमेशा RO फिल्टर या उबला हुआ पानी ही पिएं। बोतल वाला पानी बाहर यात्रा करते समय बेहतर विकल्प हो सकता है।
2. बाहर का खाना खाने से बचें
खासकर सड़क किनारे मिलने वाला खाना जितना स्वादिष्ट लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। घर का बना ताजा और गर्म खाना ही खाएं।
3. हाथों की सफाई रखें
खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ धोना न भूलें। बच्चों को भी यह आदत डालें।
4. खाने को हमेशा ढककर रखें
बरसात में मक्खियों का प्रकोप ज्यादा होता है। अपने खाने को हमेशा ढक कर रखें ताकि कीटाणु उसमें न पहुंच सकें।
5. फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं
धोते समय पानी में थोड़ा सा नमक या सिरका मिला सकते हैं जिससे बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।
6. प्रोबायोटिक फूड शामिल करें
दही, छाछ जैसे खाद्य पदार्थ आपके पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखते हैं, जिससे पाचन तंत्र मजबूत रहता है।
7. ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना अवॉइड करें
इस मौसम में पाचन शक्ति थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन लेना बेहतर होता है।
8. बीमार पड़ने पर देरी न करें
अगर उल्टी, दस्त या बुखार दो दिन से ज्यादा बना रहे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। घरेलू इलाज में समय गंवाना हानिकारक हो सकता है।
क्या खाएं बरसात में ताकि पेट रहे स्वस्थ?
- उबला हुआ या सादा चावल
- मूंग की दाल
- ताजा दही या छाछ
- उबले आलू
- सेब और केला
- हर्बल टी या अदरक की चाय
- हल्दी और जीरे वाला गर्म पानी
निष्कर्ष (Conclusion)
बरसात का मौसम खुशनुमा जरूर होता है, लेकिन यह मौसम पेट की बीमारियों के लिए भी अनुकूल होता है। थोड़ी सी सावधानी, स्वच्छता और खान-पान पर ध्यान देकर आप इस मौसम का आनंद बिना बीमार हुए भी उठा सकते हैं। याद रखें, “सावधानी में ही सुरक्षा है।”
अगर पेट से जुड़ी समस्या लगातार बनी रहती है, तो सेल्फ-मेडिकेशन करने की बजाय डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।