मानसून की शुरुआत में घर-घर फैल रहीं ये 5 बीमारियां

मानसून का मौसम जहां एक ओर गर्मी से राहत और हरियाली लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह कई बीमारियों का भी कारण बनता है। बारिश के दौरान बढ़ी हुई नमी, जलभराव और गंदगी वायरस, बैक्टीरिया और मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। यही कारण है कि मानसून के शुरुआती दिनों में कुछ बीमारियां घर-घर में दस्तक देने लगती हैं।

1. मानसून में वायरल फीवर (Viral Fever)

मानसून के आते ही वायरल संक्रमण की दर में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। लगातार बदलते तापमान और वातावरण में नमी के कारण वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। वायरल फीवर सामान्यत: एक संक्रामक रोग होता है, जो हवा, पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। इस बुखार में तापमान अचानक बढ़ सकता है और इसके साथ गले में खराश, सिरदर्द, थकावट और शरीर में दर्द जैसे लक्षण होते हैं।

यह संक्रमण अधिकतर उन लोगों को प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है – जैसे बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति। बारिश के मौसम में गीले कपड़ों में रहने, भीड़ में घुलने-मिलने और दूषित खानपान से यह रोग तेजी से फैलता है। बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना, गर्म और ताजा भोजन करना, तथा समय पर हाथ धोना बहुत जरूरी है। यदि बुखार तीन दिन से अधिक बना रहे, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

लक्षण:

  • लगातार बुखार (100°F से ऊपर)
  • सिरदर्द और शरीर में दर्द
  • कमजोरी और थकान
  • गले में खराश
  • भूख न लगना

2. मानसून में मलेरिया (Malaria)

मलेरिया एक जानलेवा रोग है जो मानसून के दौरान सबसे अधिक फैलता है। इस रोग का मुख्य कारण मादा Anopheles मच्छर होता है, जो प्लाज्मोडियम नामक पैरासाइट को इंसान के खून में पहुंचाता है। मानसून में चारों ओर जलभराव हो जाता है, जिससे मच्छरों को पनपने का अनुकूल वातावरण मिल जाता है।

मलेरिया के लक्षणों में तेज बुखार के साथ ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, कमजोरी और पसीना आना शामिल हैं। यदि समय रहते इलाज न हो तो यह गंभीर स्थिति में पहुँच सकता है, जैसे मस्तिष्क ज्वर या अंग विफलता।

इससे बचने के लिए जरूरी है कि घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और टंकी को समय-समय पर साफ करें। मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाले स्प्रे और शरीर ढकने वाले कपड़े पहनना भी जरूरी है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

लक्षण:

  • उच्च बुखार के साथ ठंड लगना
  • पसीना आना और सिरदर्द
  • मतली और उल्टी
  • शरीर में ऐंठन

3. मानसून में डेंगू (Dengue)

डेंगू मानसून में सबसे तेजी से फैलने वाला रोग है, जो दिन में काटने वाले Aedes aegypti मच्छर के कारण होता है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है – जैसे फूलदान, पानी की टंकी, कूलर, या गमले। डेंगू की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार से होती है, जो 104°F तक पहुंच सकता है। इसके साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, त्वचा पर रैशेज, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिसे “ब्रेक बोन फीवर” भी कहा जाता है।

डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और मरीज को ICU तक पहुंच सकती है। इसलिए बुखार के दौरान प्लेटलेट्स की निगरानी जरूरी होती है।

इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है मच्छर को पनपने से रोकना। पानी को ढककर रखें, सप्ताह में एक बार टंकी और कूलर की सफाई करें और घर के अंदर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लें।

लक्षण:

  • अचानक तेज बुखार (104°F तक)
  • आंखों के पीछे दर्द
  • त्वचा पर चकत्ते (rashes)
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
  • थकान और कमजोरी

4. मानसून में दस्त और फूड पॉयजनिंग (Diarrhea and Food Poisoning)

मानसून के मौसम में दस्त और फूड पॉयजनिंग के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। इसका मुख्य कारण दूषित पानी और संक्रमित भोजन होता है। नमी और गर्मी के कारण भोजन जल्दी खराब हो जाता है, और इस खराब खाने से पेट के रोग फैलने लगते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाने, बासी भोजन और कटे हुए फलों से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं, जो पेट की समस्याओं का कारण बनते हैं।

दस्त होने पर शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की अत्यधिक हानि होती है, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में यह स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है।

फूड पॉयजनिंग में पेट में मरोड़, उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। इससे बचने के लिए ताजे और घर के बने खाने को प्राथमिकता दें। बोतलबंद या उबला हुआ पानी ही पिएं और हर भोजन से पहले हाथ धोने की आदत डालें। ORS या नींबू-शक्कर-पानी जैसे घरेलू उपाय शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

मानसून में त्वचा संक्रमण और फंगल इंफेक्शन (Skin and Fungal Infections) खतरा ज्यादा होता हैं

मानसून में बढ़ी हुई नमी त्वचा संबंधित रोगों को बहुत तेजी से फैलाती है। गीले कपड़े पहनने, पसीना आने और नमी भरे वातावरण में रहने से फंगल संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यह संक्रमण खासकर बगल, जांघ, गर्दन और उंगलियों के बीच में अधिक होता है। इसमें त्वचा पर लाल दाने, खुजली, जलन और बदबूदार पसीना जैसे लक्षण होते हैं।

त्वचा संक्रमण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी संक्रमण फैल सकता है, यदि एक ही तौलिया या कपड़े का उपयोग किया जाए। बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनना और गंदगी में रहना इस समस्या को और अधिक बढ़ा देता है।

बचाव के लिए नियमित रूप से स्नान करें और शरीर को सूखा रखें। एंटीफंगल पाउडर या क्रीम का प्रयोग करें। यदि लक्षण 3 दिन से ज्यादा बने रहें तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। खासकर बच्चों में यह संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

FAQs: मानसून में फैलने वाली बीमारियों को लेकर आम सवाल

Q1. क्या मानसून में हर बुखार डेंगू हो सकता है?
नहीं, हर बुखार डेंगू नहीं होता। बुखार कई कारणों से हो सकता है – वायरल, टायफाइड, मलेरिया आदि। सही निदान के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

Q2. क्या घर में ही मच्छर पनप सकते हैं?
हाँ, यदि टंकी, कूलर, गमले आदि में पानी जमा है तो वहां मच्छर अंडे दे सकते हैं।

Q3. मानसून में कौन से फल और सब्जियाँ खानी चाहिए?
नींबू, संतरा, आंवला, पपीता, लौकी, तुरई जैसे फल-सब्जियाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।

Q4. क्या बारिश में भीगना खतरनाक है?
अगर आप भीगने के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक रहते हैं तो यह फंगल इंफेक्शन और सर्दी-खांसी को जन्म दे सकता है।

Q5. क्या मानसून में बच्चों को बाहर खेलने देना चाहिए?
बिलकुल, लेकिन उन्हें मच्छर से बचाव के उपायों जैसे मच्छर-रोधी क्रीम या पूरे कपड़े पहनाकर भेजें।

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