रात में मोबाइल या टीवी का इस्तेमाल – सोने से पहले फोन या लैपटॉप की नीली रोशनी मेलाटोनिन (नींद हार्मोन) को कम करती है, जो कैंसर से बचाव में मददगार होता है।
खराब नींद की गुणवत्ता – अगर नींद बार-बार टूटती है या नींद पूरी नहीं होती, तो 58.6% तक कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
रात की शिफ्ट में काम करना – WHO के अनुसार, लंबे समय तक नाइट शिफ्ट में काम करने से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
रात की शिफ्ट में काम करना – WHO के अनुसार, लंबे समय तक नाइट शिफ्ट में काम करने से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
सोने से ठीक पहले खाना – देर रात खाने से शरीर का "फास्टिंग टाइम" कम होता है, जिससे स्तन कैंसर का खतरा 36% तक बढ़ सकता है।
कम सोना – रोजाना 6-7 घंटे से कम नींद लेने से शरीर की सूजन और DNA रिपेयर की क्षमता प्रभावित होती है।
अनियमित नींद का समय – रोज अलग-अलग समय पर सोने से शरीर की "बायोलॉजिकल क्लॉक" गड़बड़ा सकती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।
1. तनाव और कोर्टिसोल बढ़ना – नींद पूरी न होने पर तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) बढ़ता है, जो इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है।
बचाव के उपाय – कैंसर के खतरे को कम करने के लिए:
– सोने से 1-2 घंटे पहले मोबाइल/टीवी बंद करें
– रोज एक ही समय पर सोएं और जागें
– रात में हल्का और जल्दी डिनर करें
– अंधेरे और शांत कमरे में सोएं