शिशु की रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन (स्कोलियोसिस): कारण, लक्षण और उपचार

शिशुओं में रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन, जिसे इंफेंटाइल स्कोलियोसिस (Infantile Scoliosis) कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी सामान्य सीधी रेखा के बजाय ‘C’ या ‘S’ आकार में मुड़ जाती है। यह समस्या 3 साल से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है और अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है।

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स्कोलियोसिस क्या है?

स्कोलियोसिस एक कंकाल विकार (Skeletal Disorder) है जिसमें रीढ़ की हड्डी असामान्य रूप से मुड़ जाती है। यह समस्या जन्म के समय (Congenital) या बाद में (Idiopathic) भी विकसित हो सकती है।

स्कोलियोसिस के प्रकार

  1. इंफेंटाइल स्कोलियोसिस (0-3 वर्ष) – जन्म से या शुरुआती वर्षों में दिखाई देता है।
  2. जुवेनाइल स्कोलियोसिस (4-10 वर्ष) – बड़े बच्चों में होता है।
  3. एडोलेसेंट स्कोलियोसिस (10-18 वर्ष) – किशोरावस्था में विकसित होता है।

इस लेख में हम इंफेंटाइल स्कोलियोसिस पर विशेष ध्यान देंगे।

शिशु में स्कोलियोसिस के कारण

शिशुओं में रीढ़ की हड्डी के टेढ़ेपन के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

1. जन्मजात असामान्यताएं (Congenital Scoliosis)

  • कुछ शिशुओं में रीढ़ की हड्डी की हड्डियाँ (Vertebrae) पूरी तरह विकसित नहीं होतीं।
  • कभी-कभी हड्डियाँ अधूरी बनती हैं या गलत तरीके से जुड़ जाती हैं, जिससे रीढ़ मुड़ जाती है।
  • यह समस्या गर्भावस्था के दौरान विकसित हो सकती है।

2. न्यूरोमस्कुलर विकार (Neuromuscular Scoliosis)

  • सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy), मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy), या स्पाइना बिफिडा (Spina Bifida) जैसी स्थितियों के कारण मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी का संतुलन बिगड़ जाता है।

3. आनुवंशिक कारक (Genetic Factors)

  • यदि माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य को स्कोलियोसिस रहा हो, तो बच्चे में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

4. गर्भावस्था में समस्याएं

  • यदि गर्भ में भ्रूण को पर्याप्त जगह न मिले या वह लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहे, तो रीढ़ की हड्डी का विकास प्रभावित हो सकता है।

5. अज्ञात कारण (Idiopathic Scoliosis)

  • 80% मामलों में स्कोलियोसिस का सटीक कारण पता नहीं चल पाता।
  • यह स्वतः विकसित होता है और आमतौर पर बच्चे के बढ़ने के साथ बढ़ता है

शिशु में स्कोलियोसिस के लक्षण

शिशुओं में स्कोलियोसिस के निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

1. रीढ़ का असामान्य झुकाव

  • जब बच्चा बैठता है या पेट के बल लेटता है, तो रीढ़ सीधी नहीं दिखती बल्कि एक तरफ झुकी हुई लगती है।

2. कंधों में असमानता

  • एक कंधा दूसरे से ऊँचा या नीचा दिखाई दे सकता है।

3. पसलियों का उभार

  • जब बच्चा आगे झुकता है, तो एक तरफ की पसलियाँ दूसरी तरफ से अधिक उभरी हुई दिख सकती हैं।

4. सिर का एक तरफ झुकाव

  • बच्चा अपना सिर हमेशा एक ही तरफ झुकाकर रखता है।

5. शारीरिक असंतुलन

  • कमर, कूल्हे या कंधे एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।

6. मोटर स्किल्स में देरी

  • बच्चे को बैठने, रेंगने या चलने में समय लगता है क्योंकि रीढ़ की हड्डी का संतुलन ठीक नहीं होता।

स्कोलियोसिस का निदान (Diagnosis)

यदि माता-पिता को शिशु में ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर निम्नलिखित जाँचें कर सकते हैं:

1. शारीरिक परीक्षण

  • डॉक्टर बच्चे को आगे झुकाकर रीढ़ की जाँच करते हैं।
  • कंधों, कूल्हों और पसलियों की स्थिति देखी जाती है।

2. एक्स-रे (X-ray)

  • रीढ़ की हड्डी की तस्वीर लेकर वक्रता की डिग्री मापी जाती है।
  • 10 डिग्री से अधिक वक्र होने पर स्कोलियोसिस माना जाता है।

3. एमआरआई या सीटी स्कैन

  • गंभीर मामलों में रीढ़ की हड्डी और आसपास के ऊतकों की विस्तृत जाँच की जाती है।

4. इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)

  • यदि हृदय या फेफड़ों पर दबाव का संदेह हो, तो इसकी जाँच की जाती है।

स्कोलियोसिस का उपचार (Treatment)

उपचार वक्रता की गंभीरता पर निर्भर करता है। मुख्य उपचार विकल्प निम्नलिखित हैं:

1. निगरानी और फिजियोथेरेपी

  • हल्के मामलों (10-25 डिग्री वक्र) में डॉक्टर नियमित जाँच की सलाह देते हैं।
  • विशेष व्यायाम और फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है।

2. ब्रेसिंग (पट्टी का उपयोग)

  • 25-40 डिग्री वक्र वाले बच्चों को स्पाइनल ब्रेस पहनने की सलाह दी जाती है।
  • यह ब्रेस:
  • वक्रता को बढ़ने से रोकता है
  • सर्जरी की आवश्यकता कम करता है
  • दर्द से राहत देता है

3. सर्जिकल उपचार (Surgery)

  • 40 डिग्री से अधिक वक्र वाले गंभीर मामलों में स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी की जाती है।
  • इसमें:
  • धातु की रॉड और स्क्रू लगाकर रीढ़ को सीधा किया जाता है।
  • न्यूरो मॉनिटरिंग तकनीक से लकवे का खतरा कम किया जाता है।

माता-पिता के लिए सलाह

  • शिशु की शारीरिक संरचना में किसी भी असामान्यता को शुरुआत में ही पहचानें
  • नियमित रूप से बाल रोग विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।
  • यदि कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें
  • ब्रेस पहनने की सलाह दी गई हो, तो डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

संभावित जटिलताएँ (Complications)

यदि स्कोलियोसिस का समय पर इलाज न किया जाए, तो निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं:

  • साँस लेने में कठिनाई (फेफड़ों पर दबाव के कारण)
  • पुराना पीठ दर्द
  • शारीरिक बनावट में विकृति
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव (आत्मविश्वास में कमी)

निष्कर्ष

स्कोलियोसिस एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। समय पर पहचान और उपचार से बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। यदि आपको अपने शिशु में रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन, कंधों में असमानता या पसलियों का उभार दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें

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