पहले माना जाता था कि बॉवेल कैंसर यानी कोलन या रेक्टल कैंसर सिर्फ बुजुर्गों को होता है। लेकिन अब 30-40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इसके लक्षण छोटे मोटे पेट के रोग जैसे लगते हैं, इसलिए अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
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1. बॉवेल कैंसर क्या है?
बॉवेल कैंसर, बड़ी आंत या मलद्वार (रेक्टम) में होने वाला कैंसर है। यह अक्सर छोटी गांठ (पॉलीप्स) से शुरू होता है जो धीरे-धीरे कैंसर बन जाती है।
इसमें दो तरह के कैंसर होते हैं:
- कोलन कैंसर – बड़ी आंत में
- रेक्टल कैंसर – मलद्वार के पास की आंत में
2. युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
हाल के सालों में युवाओं में बॉवेल कैंसर के केस बढ़े हैं। इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं:
- फास्ट फूड और कम फाइबर वाला खाना
- लंबे समय तक बैठना, कोई शारीरिक गतिविधि नहीं
- मोटापा
- शराब और धूम्रपान
- परिवार में कैंसर का इतिहास
3. नजरअंदाज हो जाने वाले लक्षण
बॉवेल कैंसर के लक्षण आम पाचन समस्याओं जैसे लगते हैं, जैसे:
- मल में खून आना
- दस्त या कब्ज
- पेट में गैस, मरोड़ या सूजन
- वजन का अचानक कम होना
- थकान और कमजोरी
- शरीर में खून की कमी (एनीमिया)
अगर ये लक्षण 2-3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहें, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
4. किन कारणों से होता है ये कैंसर?
कुछ मुख्य कारण हैं:
- अनुवांशिक (फैमिली हिस्ट्री)
- बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड या रेड मीट खाना
- बहुत कम फाइबर लेना
- धूम्रपान, शराब
- मोटापा
- लंबे समय से चल रही आंतों की बीमारी जैसे क्रोहन या अल्सरेटिव कोलाइटिस
5. कैसे की जाती है जांच?
बॉवेल कैंसर की जांच के लिए ये टेस्ट किए जाते हैं:
- कोलोनोस्कोपी – सबसे सटीक तरीका
- मल की जांच (FIT या स्टूल टेस्ट)
- सीटी स्कैन या एंडोस्कोपी
अगर किसी को परिवार में कैंसर रहा है या लक्षण दिख रहे हैं तो जांच जल्दी करवानी चाहिए।
6. इलाज कैसे होता है?
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितनी जल्दी पकड़ा गया:
- सर्जरी – कैंसर वाला हिस्सा निकालना
- कीमोथेरेपी – दवाओं से इलाज
- रेडिएशन – खासकर रेक्टल कैंसर में
- टार्गेटेड थेरेपी – विशेष दवाएं जो कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं
अगर कैंसर शुरूआती स्टेज में पकड़ा जाए तो इलाज सफल होने की संभावना ज्यादा होती है।
7. कैसे करें बचाव?
इन आसान उपायों से आप बॉवेल कैंसर से बच सकते हैं:
- फाइबर वाला खाना खाएं – फल, सब्जियां, साबुत अनाज
- बहुत ज्यादा रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड से बचें
- रोजाना कुछ शारीरिक गतिविधि करें
- वजन नियंत्रण में रखें
- धूम्रपान और शराब से दूर रहें
- समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं
- पेट से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें
8. युवाओं के लिए जरूरी चेतावनी
युवा अक्सर सोचते हैं कि उन्हें कैंसर नहीं हो सकता, लेकिन यह गलत सोच है। कई बार कैंसर बहुत चुपचाप शुरू होता है और जब तक पता चलता है, वह आगे बढ़ चुका होता है। इसलिए समय रहते जांच कराना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या युवाओं को भी बॉवेल कैंसर हो सकता है?
हाँ, अब यह बीमारी 30 से कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है।
2. क्या मल में खून आना चिंता की बात है?
अगर एक-दो दिन के लिए हो तो नहीं, लेकिन बार-बार हो रहा हो तो जरूर डॉक्टर से दिखाएं।
3. कोलोनोस्कोपी कराना कितना जरूरी है?
अगर लक्षण लंबे समय से हैं या परिवार में किसी को कैंसर रहा है, तो कोलोनोस्कोपी जरूरी है।
4. क्या बॉवेल कैंसर का इलाज संभव है?
हाँ, अगर समय पर पकड़ा जाए तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है।
5. क्या खानपान से बचाव किया जा सकता है?
जी हाँ, सही खानपान और जीवनशैली से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष: पेट की बात को हल्के में न लें
बॉवेल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और जागरूकता से इससे बचा जा सकता है। अगर आपके पेट या मलत्याग से जुड़ी समस्याएं हैं जो लगातार बनी रहती हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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