आज के आधुनिक मेडिकल ज़माने में आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी एक बहुत ही उपयोगी और कम तकलीफ वाली तकनीक है, जो विभिन्न जोड़ की समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। अगर आपको घुटने, कंधे, टखने या किसी जोड़ में लंबे समय से दर्द या चोट है, तो आर्थ्रोस्कोपी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी क्या होती है, इसके प्रकार, प्रक्रिया, फायदे और कुछ सामान्य पूछे जाने वाले सवाल।
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आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी क्या होती है?
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें सर्जन एक छोटा कैमरा (आर्थ्रोस्कोप) और छोटे-छोटे उपकरणों की मदद से जोड़ के अंदर का डायग्नोसिस और इलाज करता है। इस प्रक्रिया में बड़े चीरे की जगह 1-2 छोटे कट लगाए जाते हैं।
आर्थ्रोस्कोप एक ट्यूब जैसा उपकरण होता है जिसमें लाइट और कैमरा होता है, जिससे जोड़ के अंदर की तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई देती है। सर्जन इसी इमेज को देखकर इलाज करता है।
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी किन स्थितियों में होती है?
- लिगामेंट टियर (जैसे ACL, PCL)
- मेनिस्कस इंजरी
- कार्टिलेज डैमेज
- जोड़ में जकड़न
- सूजन
- बार-बार डिसलोकेशन (कंधा आदि)
- बोन स्पर
- गठिया संबंधित समस्याएं
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी के प्रमुख प्रकार
1. नी आर्थ्रोस्कोपी (घुटने की सर्जरी)
सबसे अधिक की जाने वाली आर्थ्रोस्कोपी। इसका उपयोग होता है:
- ACL/PCL लिगामेंट रिपेयर
- मेनिस्कस टियर का इलाज
- कार्टिलेज की सफाई
- सिनोवियल टिशू हटाना
2. शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी
- फ्रोज़न शोल्डर का इलाज
- रोटेटर कफ रिपेयर
- लैब्रम टियर
- डिसलोकेशन का समाधान
3. हिप आर्थ्रोस्कोपी
- लैब्रम टियर रिपेयर
- हिप इम्पिन्जमेंट का इलाज
- कार्टिलेज डैमेज कंट्रोल
4. एंकल आर्थ्रोस्कोपी
- लिगामेंट रिपेयर
- ढीले टुकड़े निकालना
- गठिया की सफाई
5. रिस्ट आर्थ्रोस्कोपी
- TFCC टियर
- गैन्ग्लियन सिस्ट निकालना
- कलाई जोड़ में सूजन
6. एल्बो आर्थ्रोस्कोपी
- टेनिस एल्बो का इलाज
- हड्डी के टुकड़े हटाना
- कोहनी की जकड़न कम करना
7. स्पाइन (एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी)
- सीमित मामलों में उपयोग
- स्लिप डिस्क या नर्व दबाव का इलाज
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे होती है? (चरणबद्ध प्रक्रिया)
- एनेस्थीसिया: लोकल या जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है।
- इंसिजन: 1-2 छोटे कट लगाए जाते हैं जोड़ के पास।
- आर्थ्रोस्कोप डालना: कैमरा जोड़ के अंदर डाला जाता है।
- डायग्नोसिस और रिपेयर: जोड़ की तस्वीर स्क्रीन पर आती है। उपकरणों से इलाज किया जाता है।
- क्लोजर: कट को बंद किया जाता है, टांके या पट्टी लगती है।
- रिकवरी: कुछ ही घंटों में मरीज घर जा सकता है।
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे
- कम खून बहना और कम दर्द
- छोटा चीरा, कम निशान
- जल्दी रिकवरी (आमतौर पर 2-4 सप्ताह)
- हॉस्पिटल में रुकना नहीं पड़ता
- डे-केयर सर्जरी (उसी दिन छुट्टी)
- फिजियोथेरेपी से मूवमेंट जल्दी लौटता है
आर्थ्रोस्कोपी के बाद रिकवरी टिप्स
- सही फिजियोथेरेपी फॉलो करें
- सूजन कम करने के लिए आइस पैक का उपयोग करें
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं लें
- जब तक डॉक्टर अनुमति न दें, भारी काम न करें
- फॉलो-अप चेकअप ज़रूर कराएं
रिस्क फैक्टर्स या साइड इफेक्ट्स
हर सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम हो सकते हैं:
- संक्रमण (बहुत कम)
- सूजन या जकड़न
- ब्लड क्लॉट (बहुत ही कम)
- नर्व डैमेज (अत्यंत दुर्लभ)
- लक्षणों की वापसी (कभी-कभी इलाज असफल हो सकता है)
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी से जुड़े 5 सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: क्या आर्थ्रोस्कोपी में दर्द होता है?
उत्तर: सर्जरी के दौरान दर्द नहीं होता क्योंकि एनेस्थीसिया दिया जाता है। बाद में थोड़ी असुविधा हो सकती है जिसे दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है।
प्रश्न 2: क्या इस सर्जरी के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, यह आमतौर पर डे-केयर प्रक्रिया होती है। मरीज उसी दिन घर जा सकता है।
प्रश्न 3: रिकवरी में कितना समय लगता है?
उत्तर: जोड़ और समस्या के अनुसार 2 से 6 सप्ताह लगते हैं बेसिक रिकवरी के लिए। पूरी तरह ठीक होने में 2-3 महीने लग सकते हैं।
प्रश्न 4: क्या इस सर्जरी के बाद जोड़ फिर से सामान्य हो जाता है?
उत्तर: हां, अगर सही से आराम और फिजियोथेरेपी की जाए तो जोड़ पूरी तरह सामान्य हो सकता है।
प्रश्न 5: भारत में इसकी लागत कितनी होती है?
उत्तर: लागत अस्पताल और शहर पर निर्भर करती है, लेकिन सामान्यतः ₹30,000 से ₹1,50,000 तक होती है।
निष्कर्ष:
आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी एक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक तकनीक है जिससे कई प्रकार की जोड़ समस्याओं का इलाज बिना बड़े ऑपरेशन के किया जा सकता है। यदि आप किसी जोड़ दर्द से परेशान हैं, तो एक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें और आर्थ्रोस्कोपी को एक विकल्प के रूप में ज़रूर देखें।
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