कई महिलाएं यह मानती हैं कि बच्चेदानी (हिस्टेरेक्टॉमी) निकलवाने के बाद उन्हें ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होने का कोई खतरा नहीं रहता। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। चिकित्सा शोधों से पता चला है कि हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निष्कासन सर्जरी) के बाद भी ओवेरियन कैंसर होने की संभावना बनी रह सकती है, खासकर अगर सर्जरी के दौरान अंडाशय (ओवरीज) को नहीं निकाला गया हो ।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि क्यों हिस्टेरेक्टॉमी के बाद भी ओवेरियन कैंसर हो सकता है, इसके लक्षण क्या हैं, जोखिम कारक कौन से हैं और उपचार के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।
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हिस्टेरेक्टॉमी के प्रकार और ओवेरियन कैंसर का जोखिम
hysterectomy कई प्रकार की होती है और ओवेरियन कैंसर का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि सर्जरी में कौन से अंग निकाले गए हैं:
- आंशिक हिस्टेरेक्टॉमी: इसमें केवल गर्भाशय का ऊपरी भाग निकाला जाता है, गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय छोड़ दिए जाते हैं। इस स्थिति में ओवेरियन कैंसर का जोखिम बना रहता है ।
- कुल हिस्टेरेक्टॉमी: इसमें गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को निकाल दिया जाता है, लेकिन अंडाशय को छोड़ दिया जाता है। इस स्थिति में भी ओवेरियन कैंसर का खतरा रहता है ।
- कुल हिस्टेरेक्टॉमी सहित सैल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी: इसमें गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, फैलोपियन ट्यूब और दोनों अंडाशय निकाल दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया के बाद ओवेरियन कैंसर का जोखिम काफी कम हो जाता है, लेकिन फिर भी पेरिटोनियल कैंसर (उदर गुहा की अंदरूनी परत का कैंसर) का छोटा सा जोखिम बना रहता है ।
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर के लक्षण
ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर शुरुआती चरणों में स्पष्ट नहीं होते। हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर के संभावित लक्षणों में शामिल हैं :
- पेट या श्रोणि क्षेत्र में लगातार दर्द या बेचैनी
- पेट फूलना या सूजन महसूस होना
- खाने में कठिनाई या थोड़ा खाने पर ही पेट भरा हुआ महसूस करना
- बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- अपच या कब्ज की समस्या
- योनि से असामान्य रक्तस्राव (हालांकि हिस्टेरेक्टॉमी के बाद यह कम संभव है)
ये लक्षण अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ।
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर के कारण और जोखिम कारक
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर होने के कई कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं :
- अंडाशय का बचा रहना: यदि हिस्टेरेक्टॉमी के दौरान अंडाशय नहीं निकाले गए हैं, तो ओवेरियन कैंसर का जोखिम बना रहता है।
- पेरिटोनियल कैंसर: अंडाशय निकाल देने के बाद भी पेरिटोनियम (उदर गुहा की अंदरूनी परत) में कैंसर हो सकता है, क्योंकि यह ऊतक अंडाशय के ऊतकों के समान होता है।
- आनुवंशिक कारक: BRCA1 और BRCA2 जीन में उत्परिवर्तन वाली महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
- पारिवारिक इतिहास: परिवार में ओवेरियन कैंसर या स्तन कैंसर का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
- उम्र: 50-70 वर्ष की आयु की महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा अधिक होता है।
- प्रजनन इतिहास: जिन महिलाओं ने कभी गर्भधारण नहीं किया या 35 वर्ष की आयु के बाद पहला बच्चा हुआ, उनमें जोखिम अधिक होता है।
- हार्मोन थेरेपी: लंबे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन थेरेपी लेने से जोखिम बढ़ सकता है।
निदान और उपचार के विकल्प
निदान
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर का निदान करने के लिए निम्नलिखित परीक्षण किए जा सकते हैं :
- श्रोणि परीक्षा: डॉक्टर द्वारा शारीरिक जांच
- अल्ट्रासाउंड: अंडाशय और आसपास के अंगों की छवि बनाने के लिए
- सीटी स्कैन या एमआरआई: कैंसर के फैलाव का पता लगाने के लिए
- CA-125 रक्त परीक्षण: एक ट्यूमर मार्कर जो ओवेरियन कैंसर में बढ़ सकता है
- बायोप्सी: कैंसर की पुष्टि के लिए ऊतक का नमूना लेना
उपचार विकल्प
ओवेरियन कैंसर का उपचार कैंसर के प्रकार, चरण और रोगी की समग्र स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है :
- सर्जरी: अगर पहले हिस्टेरेक्टॉमी में अंडाशय नहीं निकाले गए थे, तो अब उन्हें निकाला जा सकता है। इसमें दोनों अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के लिम्फ नोड्स निकाले जा सकते हैं।
- कीमोथेरेपी: कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग। यह सर्जरी के बाद या उन्नत चरण के कैंसर में प्राथमिक उपचार के रूप में दी जा सकती है।
- टार्गेटेड थेरेपी: कैंसर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर हमला करने वाली दवाएं।
- हार्मोन थेरेपी: कुछ प्रकार के ओवेरियन कैंसर में हार्मोन को ब्लॉक करने वाली दवाएं।
- रेडियोथेरेपी: कुछ विशेष मामलों में विकिरण चिकित्सा का उपयोग किया जा सकता है।
रोकथाम और निगरानी
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं :
- नियमित जांच: यदि आपके पास ओवेरियन कैंसर का पारिवारिक इतिहास है या आप उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आती हैं, तो नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाएं।
- जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान से बचें।
- आनुवंशिक परामर्श: यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो आनुवंशिक परीक्षण और परामर्श लें।
- निवारक सर्जरी: उच्च जोखिम वाली महिलाओं के लिए, निवारक उद्देश्य से अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब निकालने पर विचार किया जा सकता है।
- लक्षणों पर नजर: किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
5 महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQs)
1. क्या हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर हो सकता है?
हां, यदि hysterectomy के दौरान अंडाशय नहीं निकाले गए हैं, तो ओवेरियन कैंसर का जोखिम बना रहता है। यहां तक कि अंडाशय निकाल देने के बाद भी पेरिटोनियल कैंसर (जो ओवेरियन कैंसर के समान होता है) का छोटा सा जोखिम रहता है ।
2. हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर के क्या लक्षण हो सकते हैं?
इसके लक्षणों में पेट या श्रोणि में दर्द, पेट फूलना, खाने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना, थकान और अपच शामिल हो सकते हैं। ये लक्षण सामान्य समस्याओं से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए यदि वे दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।
3. हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?
निदान के लिए श्रोणि परीक्षा, अल्ट्रासाउंड, सीटी/एमआरआई स्कैन, CA-125 रक्त परीक्षण और बायोप्सी जैसे परीक्षण किए जा सकते हैं ।
4. क्या हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर को रोका जा सकता है?
जोखिम को कम करने के लिए नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली, आनुवंशिक परामर्श और उच्च जोखिम वाली महिलाओं के लिए निवारक सर्जरी पर विचार किया जा सकता है ।
5. हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ओवेरियन कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
उपचार में सर्जरी (अंडाशय निकालना), कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, हार्मोन थेरेपी और कुछ मामलों में रेडियोथेरेपी शामिल हो सकती है। उपचार कैंसर के प्रकार और चरण पर निर्भर करता है ।
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