टीबी (क्षय रोग) होने के 10 कारण, लक्षण और उपचार

टीबी (क्षय रोग): टीबी, जिसे ट्यूबरक्युलोसिस के नाम से भी जाना जाता है, एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस नामक बैक्टीरिया के माध्यम से होती है। यह आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह हड्डियों, मस्तिष्क, किडनी और रीढ़ की हड्डी सहित शरीर के अन्य अंगों को भी संक्रमित कर सकता है। यह रोग तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, जिससे बैक्टीरिया वातावरण में मिल जाते हैं।


टीबी (क्षय रोग) के 10 प्रमुख कारण

  1. संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क – यदि कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के पास रहता है, तो उसे संक्रमण की संभावना होती है।
  2. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली – एचआईवी/एड्स, मधुमेह, और कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित लोगों में टीबी का खतरा अधिक होता है।
  3. कुपोषण – यदि व्यक्ति को उचित पोषण नहीं मिलता है, तो उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है, जो संक्रमण को बढ़ावा देती है।
  4. धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन – ये आदतें फेफड़ों की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाती हैं और टीबी के विकास में योगदान कर सकती हैं।
  5. घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहना – जिन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता है, वहां संक्रमण फैलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
  6. अन्य शारीरिक बीमारियाँ – लोग जो अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं, उनमें टीबी का संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है।
  7. कमजोर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएँ – अपर्याप्त चिकित्सा देखभाल के कारण टीबी का जल्द पहचानना और उपचार में देरी हो सकती है।
  8. यातायात और यात्रा – लंबी दूरी की यात्रा या सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी टीबी फैलने का खतरा होता है।
  9. गंदी जीवन स्थितियाँ – स्वच्छता की कमी वाले वातावरण में रहने से रोगों का संचार तेजी से हो सकता है।
  10. आत्मसंतुष्टि और उपचार में लापरवाही – कुछ लोग उपचार के नियमों का पालन नहीं करते, जिससे टीबी के लक्षणों का पुनरुत्पादन हो सकता है।

टीबी (क्षय रोग) के लक्षण

  1. खांसी का लगातार बने रहना (2 सप्ताह से अधिक)
  2. खांसी के साथ रक्त का आना
  3. बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में कमी आना
  4. रात के समय अत्यधिक पसीना आना
  5. थकान और कमजोरी का अनुभव होना
  6. बुखार और ठंड का अहसास होना
  7. भोजन के प्रति अरुचि होना
  8. सीने में तीव्र दर्द होना
  9. सांस लेने में कठिनाई होना
  10. गांठ या सूजन (यदि टीबी अन्य अंगों में फैल गई हो)

टीबी (क्षय रोग) का उपचार

डॉक्टर से परामर्श करें – अगर आपको टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

  1. टीबी का परीक्षण – टीबी की पहचान बलगम परीक्षण, एक्स-रे और एमटी परीक्षण के माध्यम से की जाती है।
  2. एंटी-टीबी उपचार (DOTS चिकित्सा) – एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स छह महीने या उससे अधिक समय तक करना आवश्यक है।
  3. संतुलित आहार लें – अपने आहार में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स को शामिल करें, ताकि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनी रहे।
  4. स्वच्छता और हाइजीन का ध्यान रखें – टीबी से प्रभावित व्यक्ति को मास्क पहनने और खाँसी या छींक को ढंकने का ध्यान रखना चाहिए।
  5. धूम्रपान और शराब से बचें – ये पदार्थ फेफड़ों को कमजोर करते हैं और बीमारी से ठीक होने में बाधा पैदा कर सकते हैं।
  6. उपचार का पूरा कोर्स पूरा करें – दवाओं को बीच में छोड़ने से बचें, क्योंकि ऐसा करने पर बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन सकते हैं।
  7. योग और व्यायाम करें – नियमित शारीरिक गतिविधियाँ आपके श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती हैं और जल्दी ठीक होने में मदद करती हैं।
  8. सकारात्मक मानसिकता बनाए रखें – मानसिक रूप से मजबूत रहना और तनाव से बचना उपचार प्रक्रिया में सहायक होता है।
  9. टिकाकरण (BCG वैक्सीनेशन) – टीबी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बीसीजी वैक्सीनेशन करवाना महत्वपूर्ण है।

टीबी की दवा कितने दिन में असर करती है?

टीबी (क्षय रोग): टीबी के उपचार की प्रभावशीलता आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह के भीतर दिखाई देने लगती है। इस समय के दौरान, रोगी के लक्षण जैसे खांसी, बुखार, रात को पसीना आना और कमजोरी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

इसके बावजूद, संक्रमण को संपूर्ण रूप से समाप्त करने और रोग से पूरी तरह ठीक होने में 6 से 9 महीने का समय लग सकता है। कुछ गंभीर मामलों में, उपचार की अवधि 12 से 18 महीने तक बढ़ाई जा सकती है।

निष्कर्ष

टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते कि इसका समय पर और सही तरीके से इलाज किया जाए। जागरूकता, सही खान-पान, साफ-सफाई और नियमित दवा के सेवन से इस बीमारी को रोका और ठीक किया जा सकता है। यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति टीबी के लक्षणों से ग्रसित है, तो बिना देर किए चिकित्सा सहायता लें।

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